बोकारो स्टील प्लांट पर बड़ा संकट: ₹20 हजार करोड़ का निवेश अधर में

Live ख़बर

-लाइव ख़बर नेशन || संतोष श्रीवास्तव

उग्र आंदोलन और सियासी दांवपेच से उत्पादन ठप होने का खतरा, विस्थापितों के नियोजन पर फंसा पेंच

बोकारो, 18 अक्टूबर 2026 : देश की औद्योगिक रीढ़ माना जाने वाला बोकारो इस्पात संयंत्र (बीएसएल) एक बार फिर गंभीर संकट में घिर गया है। संयंत्र के विस्तार के लिए प्रस्तावित 20 हजार करोड़ रुपये के आधुनिक ब्राउनफील्ड प्रोजेक्ट पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं। प्लांट के गेटों पर चल रहे उग्र विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक खींचतान के कारण एशिया के इस प्रमुख इस्पात केंद्र का भविष्य दांव पर लग गया है। यदि यह गतिरोध जल्द समाप्त नहीं हुआ, तो केंद्रीय इस्पात मंत्रालय इस भारी-भरकम पूंजी निवेश को किसी अन्य शांत और सुरक्षित इकाई में स्थानांतरित करने पर विचार कर सकता है।

करीब छह दशकों से देश के विकास और स्थानीय अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभा रहे इस कारखाने में 9 मिलियन टन वार्षिक उत्पादन क्षमता हासिल करने की तैयारी चल रही थी। अप्रैल 2025 में हुए हिंसक उपद्रव के बाद भी परियोजना को बाहर भेजने की चर्चा उठी थी, जिसे प्रबंधन और जन प्रतिनिधियों की सूझबूझ से संभाला गया था। अब दोबारा शुरू हुए हंगामे ने कानून-व्यवस्था की गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। प्रबंधन ने संयंत्र की सुरक्षा और कामकाज को सुचारु बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन से दखल की मांग की है।

इस औद्योगिक तनाव का सीधा असर आम जनजीवन पर भी पड़ा है। त्योहार के इस मौसम में जहां बाजारों और पंडालों में रौनक होनी चाहिए थी, वहीं शहर में तनाव और सन्नाटा पसरा हुआ है। प्लांट के प्रवेश द्वारों पर सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ानी पड़ी है।

आंदोलन की मुख्य वजह स्थानीय विस्थापितों का नियोजन विवाद है। आंदोलनकारी 1,500 विस्थापित अप्रेंटिस प्रशिक्षुओं की अविलंब नियमित बहाली, चतुर्थ वर्ग के पदों पर पुरानी आरक्षण व्यवस्था लागू करने और जमीन देने वाले परिवारों के लिए स्थायी रोजगार नीति की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट रुख है कि उन्हें ठेकेदारी के बजाय स्थायी नियुक्ति पत्र चाहिए। यदि प्रशासन, सरकार और प्रबंधन ने समय रहते वार्ता के जरिए सर्वमान्य हल नहीं निकाला, तो यह औद्योगिक विवाद क्षेत्र के भविष्य के लिए बेहद नुकसानदेह साबित हो सकता है।

Verified by MonsterInsights