– Santosh Kr. Srivastav : Editor in Chief & Publisher
सीबीएसई की जिलास्तरीय डेलिबरेशन कार्यशाला, 14 स्कूलों के करीब 30 शिक्षकों ने साझा किए नवाचारी शिक्षण अनुभव
बोकारो, 8 अगस्त 2026। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और तकनीकी बदलावों से जोड़ने के उद्देश्य से शनिवार को दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) बोकारो में सीबीएसई की जिलास्तरीय डेलिबरेशन कार्यशाला (डीएलडी) का आयोजन किया गया। कार्यशाला में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए सीबीएसई द्वारा निर्धारित विषय ‘कंप्यूटेशनल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की समझ’ पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।
कार्यशाला में जिले के 14 विद्यालयों के करीब 30 शिक्षक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। शिक्षकों ने अपने-अपने संस्थानों में 21वीं सदी की शिक्षा के अनुरूप किए जा रहे नवाचारी प्रयासों, कक्षा में एआई के उपयोग, समस्या-समाधान कौशल और शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को प्रभावी बनाने से जुड़े अनुभव साझा किए।
विशेषज्ञों ने किया कार्यशाला का उद्घाटन
कार्यक्रम का उद्घाटन डीपीएस बोकारो के प्राचार्य एवं सीबीएसई सिटी कोऑर्डिनेटर डॉ. ए. एस. गंगवार, बीआईटी मेसरा के असिस्टेंट प्रोफेसर एवं प्रमुख (क्वांटिटेटिव इकोनॉमिक्स एंड डेटा साइंस) डॉ. मनीष कुमार पांडेय, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रियांक सक्सेना तथा आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के सहयोगी व्याख्याता प्रो. अरुण दयाल उदय ने संयुक्त रूप से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
इस अवसर पर विद्यालय के वरीय उप प्राचार्य अंजनी भूषण, उपप्राचार्या शालिनी शर्मा, प्रधानाध्यापिका डॉ. सरिता गंगवार, प्रीति सिन्हा, अनिंदिता भद्रा, निमिषा रानी तथा प्रधानाध्यापक गोपाल नारायण विश्वकर्मा उपस्थित रहे। विद्यालय के विद्यार्थियों ने स्वागत गान प्रस्तुत किया। इसके बाद हेडमिस्ट्रेस निमिषा रानी ने कार्यक्रम का विषय-प्रवेश कराया।
एआई शिक्षा का भविष्य : डॉ. गंगवार
डीपीएस बोकारो के प्राचार्य एवं सीबीएसई सिटी कोऑर्डिनेटर डॉ. ए. एस. गंगवार ने कहा कि भविष्योन्मुखी शिक्षा की दिशा में इस तरह के कार्यक्रम महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने एआई और कंप्यूटेशनल थिंकिंग को 21वीं सदी की शिक्षा के लिए मूलभूत कौशल बताते हुए कक्षा में एआई के उपयोग पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि अध्यापन और सीखने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका है। कार्यशाला में होने वाले आपसी ज्ञानार्जन और विचार-विमर्श का लाभ विद्यार्थियों को मिलने की उम्मीद उन्होंने जताई। इस अवसर पर आमंत्रित विशेषज्ञों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित भी किया गया।
डेटा आधारित होगा भविष्य : डॉ. मनीष
बीआईटी मेसरा से आमंत्रित विशेषज्ञ डॉ. मनीष कुमार पांडेय ने कहा कि आने वाला समय डेटा आधारित होगा और तकनीकी विकास में डेटा की भूमिका लगातार बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप विद्यार्थियों को तैयार करने के लिए तीसरी-चौथी कक्षा के बाद से ही एआई और कंप्यूटेशनल थिंकिंग जैसी अवधारणाओं से परिचित कराना उपयोगी होगा।
उन्होंने बताया कि एआई शिक्षकों को सिलेबस तैयार करने, क्लासरूम आउटकम तय करने और लेक्चर प्लानिंग सहित कई शैक्षणिक कार्यों में मदद कर सकता है। उन्होंने कंप्यूटेशनल थिंकिंग को बढ़ावा देने के लिए विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की परिस्थितियों से जोड़ने पर भी जोर दिया।
एक अन्य विशेषज्ञ डॉ. प्रियांक सक्सेना ने तेजी से बदलती तकनीक के अनुरूप शिक्षकों को तैयार करना वर्तमान समय की प्रमुख चुनौती बताया। उन्होंने ऐसी कार्यशालाओं को शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण और प्रासंगिक बताया।
केस पेपर प्रस्तुतियों की हुई समीक्षा
कार्यशाला के प्रथम सत्र में प्रतिभागी शिक्षकों ने अपने केस पेपर प्रस्तुत किए। प्रस्तुतियों में विद्यालयों के नवाचारी प्रयासों, कक्षा में एआई के इस्तेमाल, समस्या-समाधान कौशल तथा शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के उपायों को रेखांकित किया गया।
इसके बाद खुले सत्र में केस पेपर पर प्रश्नोत्तर हुआ। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों से सीधे संवाद करते हुए उनकी प्रस्तुतियों पर सवाल किए और विभिन्न पहलुओं पर सुझाव दिए।
अंतिम सत्र में प्रस्तुतियों की प्रभावशीलता, प्रामाणिकता, नवाचार, प्रासंगिकता, लागत, समावेशिता सहित विभिन्न मापदंडों के आधार पर सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुति का चयन किया गया। चयनित प्रस्तुतियों को सीबीएसई उत्कृष्टता केंद्र भेजा जाएगा।
इन विद्यालयों के शिक्षकों ने लिया हिस्सा
कार्यशाला में डीपीएस बोकारो के साथ डीपीएस चास, जीजीपीएस बोकारो, जीजीपीएस चास, श्री अय्यप्पा पब्लिक स्कूल, आदर्श विद्या मंदिर, क्रिसेंट पब्लिक स्कूल, डीवाई पाटिल इंटरनेशनल स्कूल, होलीक्रॉस बालीडीह, होलीक्रॉस चंदनकियारी, इनोवेट पब्लिक स्कूल बेरमो, लीला जानकी पब्लिक स्कूल पेटरवार, पिट्स मॉडर्न स्कूल गोमिया तथा सैमफोर्ड इंटरनेशनल एकेडमी बोकारो के शिक्षकों ने भाग लिया।
कार्यशाला में शिक्षकों ने तकनीक आधारित शिक्षण, एआई के जिम्मेदार उपयोग, समस्या-समाधान क्षमता और भविष्य की कक्षाओं की जरूरतों पर विचार साझा किए। आयोजन का उद्देश्य शिक्षकों को बदलते तकनीकी परिवेश के अनुरूप तैयार करने के साथ विद्यार्थियों के लिए अधिक प्रभावी और भविष्योन्मुखी शिक्षण वातावरण विकसित करना रहा।

