– संतोष श्रीवास्तव की रिपोर्ट
टीसीए राघवन बोले- आतंकवाद के खिलाफ कठोर नीति के साथ पड़ोसी देशों से संवाद भी जरूरी, बदलते क्षेत्रीय समीकरणों पर हुई चर्चा
पटना : 31 अगस्त 2026 | प्रख्यात राजनयिक, विद्वान और लेखक टीसीए राघवन ने कहा कि दक्षिण एशिया में तेजी से बदलती परिस्थितियों को देखते हुए भारत को भावनाओं के बजाय व्यावहारिक और संतुलित सोच के साथ दीर्घकालिक रणनीति तैयार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की ओर से होने वाले आतंकवादी हमलों के खिलाफ भारत को अपना सख्त रुख कायम रखना चाहिए, लेकिन लंबे समय में पड़ोसी देशों के साथ संवाद और संपर्क की आवश्यकता को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
राघवन बिहार लोक भवन में आयोजित ‘पाटलिपुत्र प्रज्ञा प्रवाह’ श्रृंखला के पहले व्याख्यान में ‘मक्का समझौता, पाकिस्तान और भारत-पाकिस्तान संबंधों का भविष्य’ विषय पर बोल रहे थे। व्याख्यान में भारत-पाक संबंधों, बदलते क्षेत्रीय समीकरणों और दक्षिण एशिया की रणनीतिक परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा हुई।
पाकिस्तान-तुर्किये-सऊदी अरब के समीकरण पर चर्चा
राघवन ने मक्का समझौते के संदर्भ में पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब के बीच बढ़ते सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की परमाणु और रक्षा क्षमता, सऊदी अरब के आर्थिक संसाधन तथा तुर्किये की आधुनिक तकनीकी क्षमता मिलकर मध्य-पूर्व के साथ-साथ दक्षिण एशिया में भी नए अवसर और चुनौतियां पैदा कर सकती हैं।
उन्होंने कहा कि ये तीनों देश अमेरिका के साथ अपने-अपने संबंध बनाए हुए हैं, लेकिन इस पूरे समीकरण में चीन की भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार मक्का समझौता क्षेत्र में अधिक स्वतंत्र और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
राघवन ने विदेश नीति को केवल जीत या हार के नजरिए से देखने के बजाय राष्ट्रीय हितों के आधार पर बहुआयामी संबंधों को समझने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में कोई भी देश अपने हितों के अनुरूप एक साथ कई देशों के साथ संबंध बनाए रख सकता है।

आधुनिक तकनीक से बदल रहा युद्ध का स्वरूप
व्याख्यान में उन्होंने कहा कि युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। आधुनिक तकनीक के कारण शक्तिशाली और अपेक्षाकृत कमजोर देशों के बीच पारंपरिक अंतर धीरे-धीरे कम हो रहा है। ऐसे में भारत के लिए बदलती सामरिक परिस्थितियों को समझते हुए व्यावहारिक और संतुलित रणनीति बनाना जरूरी है।
राज्यपाल ने ‘पाटलिपुत्र प्रज्ञा प्रवाह’ की अवधारणा पर रखे विचार
इससे पहले ‘पाटलिपुत्र प्रज्ञा प्रवाह’ की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने कहा कि बिहार प्राचीन काल से ही ज्ञान, चिंतन, तर्क और विचारों के आदान-प्रदान का प्रमुख केंद्र रहा है। उन्होंने इस परंपरा को फिर से मजबूत करने की आवश्यकता बताई।
राज्यपाल ने कहा कि बिहार लोक भवन में आगे भी विभिन्न विषयों पर व्याख्यान और संगोष्ठियां आयोजित की जाएंगी। उन्होंने ऐसे कार्यक्रमों को राज्य के विभिन्न हिस्सों तक ले जाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि ज्ञान और नए विचार अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सकें।
विश्वविद्यालयों में भी ऐसे कार्यक्रम कराने की अपील
राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि बिहार लोक भवन में इस तरह के कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे। विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को आमंत्रित कर महत्वपूर्ण विषयों पर संवाद कराया जाएगा।
उन्होंने विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने की अपील की, ताकि विद्यार्थियों, शिक्षकों और शोधार्थियों के बीच विचार-विमर्श की संस्कृति को बढ़ावा मिल सके।
चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, पटना के कुलपति डॉ. फैजान मुस्तफा ने सत्र का संचालन किया। उन्होंने व्याख्यान श्रृंखला शुरू करने की बिहार लोक भवन की पहल की सराहना की।
व्याख्यान के बाद प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित हुआ, जिसमें विभिन्न प्रतिभागियों ने विषय से जुड़े सवाल पूछे और टीसीए राघवन ने उनके जवाब दिए। कार्यक्रम में राज्य सरकार और सेना के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न विश्वविद्यालयों के शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी तथा अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

