–लाइव ख़बर नेशन || एस०एन०चतुर्वेदी
लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में 1497 विद्यार्थियों को मिली उपाधि, पांडुलिपियों के संरक्षण पर दिया बल
पटना/नई दिल्ली, 08 अक्टूबर 2026 : नई दिल्ली स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह में भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक सोच का अद्भुत संगम देखने को मिला। समारोह को संबोधित करते हुए भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने संस्कृत को देश की भाषाई और सांस्कृतिक चेतना को एक सूत्र में पिरोने वाली ‘स्वर्णिम डोर’ करार दिया। उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा को विश्व पटल पर ज्ञान-विमर्श के मुख्य केंद्र के रूप में प्रतिष्ठित करने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकान्त मजूमदार उपस्थित रहे। वैदिक मंगलाचरण और सरस्वती वंदना के साथ प्रारंभ हुए इस भव्य आयोजन में विभिन्न पाठ्यक्रमों के 1497 छात्र-छात्राओं को उपाधियां प्रदान की गईं और मेधावियों को स्वर्ण पदक देकर सम्मानित किया गया। उपराष्ट्रपति ने विश्वविद्यालय को नैक (NAAC) द्वारा ‘A++’ ग्रेड मिलने पर कुलपति प्रो. मुरलीमनोहर पाठक और पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की सोच को याद करते हुए कहा कि संस्कृत अध्ययन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार दिया जाए ताकि दुनिया भर के शोधार्थी यहां आएं।

उपराष्ट्रपति ने ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ का उल्लेख करते हुए प्राचीन व अप्रकाशित पांडुलिपियों के संरक्षण, वैज्ञानिक अध्ययन और प्रकाशन को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकान्त मजूमदार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत भारतीय ज्ञान प्रणाली को तकनीकी युग से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने संस्कृत के विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), आधुनिक भाषा विज्ञान और कंप्यूटर तकनीक सीखने का आह्वान किया।
समारोह में अतिथियों द्वारा ‘शोध प्रभा’, ‘आम्नाय कल्पतरु’ और ‘विद्यामृतम् ग्रंथ’ का विमोचन किया गया। इस अवसर पर कुलसचिव प्रो. पवन कुमार शर्मा, वित्त अधिकारी संतोष कुमार श्रीवास्तव, कार्यपरिषद सदस्य, संकाय सदस्य, अधिकारी, शोधार्थी और बड़ी संख्या में अभिभावक उपस्थित रहे। राष्ट्रगान के साथ दीक्षांत समारोह का गरिमापूर्ण समापन हुआ।
