पलायन और मातृत्व की संवेदना को मंच पर जीवंत करता रहा ‘गबरघिचोर’

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– रंजीत प्रसाद सिन्हा की रिपोर्ट

सूत्रधार के प्रभावशाली मंचन ने दर्शकों को सोचने पर किया मजबूर, भिखारी ठाकुर की कालजयी कृति को मिली भरपूर सराहना

खगौल : खगौल स्थित पूर्व मध्य रेलवे सीनियर सेकेंडरी स्कूल के सृजन प्रेक्षागृह में रविवार को चर्चित नाट्य संस्था सूत्रधार द्वारा लोकनाट्य सम्राट भिखारी ठाकुर की कालजयी रचना ‘गबरघिचोर’ का प्रभावशाली मंचन किया गया। नाटक की परिकल्पना एवं निर्देशन नवाब आलम ने किया। सशक्त अभिनय, प्रभावी संवाद और लोक शैली की प्रस्तुति ने दर्शकों को ग्रामीण समाज की ज्वलंत समस्याओं से रूबरू कराया।

नाटक में रोजगार की तलाश में पुरुषों के पलायन के कारण गांव में अकेली रह गई महिलाओं की पीड़ा, सामाजिक उपेक्षा और उनके संघर्ष को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया। कहानी में गबरघिचोर को लेकर पंचायत में उत्पन्न विवाद के माध्यम से सामाजिक नैतिकता, स्वार्थ और न्याय जैसे महत्वपूर्ण विषयों को उकेरा गया। अंततः मां की ममता, त्याग और सत्य के आगे पंचायत का हृदय परिवर्तन होता है तथा न्याय मां के पक्ष में होता है।

मंचन में मिथिलेश कुमार पांडेय ने पंच, सिंपी सिंह ने गलीज बहू, मुकेश कुमार ने गलीज, अमन कुमार ने गड़बड़ी, कुंदन कुमार ने गबरघिचोर तथा प्रेम प्रकाश सैनिक ने जल्लाद की भूमिका निभाकर दर्शकों की खूब सराहना बटोरी। रूप-सज्जा की जिम्मेदारी जयप्रकाश मिश्र ने निभाई, जबकि संगीत संयोजन में अखिलेश सिंह सहित अन्य कलाकारों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

कार्यक्रम में पूर्व मध्य रेलवे के वरीय मंडल कार्मिक अधिकारी अतुल कुमार, अनिल सुलभ, बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन की अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) मधु प्रभा सिंह, मनीष कुमार, दीनानाथ प्रसाद यादव सहित अनेक साहित्यकार, रंगकर्मी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। नाटक के समापन पर दर्शकों ने कलाकारों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया।