– एस०एन०चतुर्वेदी की रिपोर्ट
बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में हिन्दी पखवारा एवं पुस्तक चौदस मेला का शुभारंभ, हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने की उठी मांग
पटना, 04 सितंबर 2026: प्रत्येक व्यक्ति, चाहे वह विद्यार्थी हो या शिक्षक, सभी को पुस्तकों से अवश्य जुड़ना चाहिए। पुस्तकें केवल ज्ञान ही नहीं देतीं, बल्कि थके हुए मन को नया उत्साह और ऊर्जा भी प्रदान करती हैं। यह विचार सिक्किम के पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद ने कदमकुआं स्थित बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में आयोजित ‘हिन्दी पखवारा एवं पुस्तक चौदस मेला’ का उद्घाटन करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि पूरा देश अब हिन्दी के महत्व को समझ रहा है और दक्षिण व पूर्वोत्तर राज्यों में भी यह संपर्क भाषा के रूप में तेजी से अपनाई जा रही है। उन्होंने हिन्दी को राष्ट्र का स्वाभिमान बताते हुए इसे पूर्ण प्रतिष्ठा देने पर बल दिया।
हिन्दी को मिले राष्ट्रभाषा का दर्जा: डॉ. अनिल सुलभ
समारोह के मुख्य अतिथि बिहार राज्य उपभोक्ता संरक्षण आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति संजय कुमार ने कहा कि पाठकों में पुस्तकों और हिन्दी के प्रति बढ़ता रुझान अत्यंत शुभ संकेत है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सम्मेलन अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ ने कहा कि देशवासी अब हिन्दी को केवल राजभाषा के कागजी दायरे में सीमित न रखकर राष्ट्रभाषा के रूप में देखना चाहते हैं। उन्होंने महान हिन्दी सेवी फादर कामिल बुल्के और नृपेंद्रनाथ गुप्त के योगदान को याद करते हुए पुस्तक मेले से पुस्तकें खरीदने का आह्वान किया।
मेले में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (NBT), सम्मेलन के प्रकाशन विभाग और अन्य प्रमुख प्रकाशकों द्वारा ज्ञानवर्धक पुस्तकों की प्रदर्शनी लगाई गई है। इस अवसर पर सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी व कवि बच्चा ठाकुर, डॉ. रत्नेश्वर सिंह, डॉ. सुधा सिन्हा, प्रो. उषा सिंह सहित अनेक गणमान्य साहित्यकारों और पुस्तक प्रेमियों ने पुस्तकें खरीदकर पाठकों को प्रेरित किया।
