– संतोष श्रीवास्तव की रिपोर्ट
राजस्थान और उत्तर प्रदेश के आदेशों को चुनौती देने वाली PIL पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार; फैसला प्रतिबंध की संवैधानिकता पर नहीं
नई दिल्ली | 4 सितंबर 2026 : सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों, पत्रकारों, YouTubers और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों के प्रवेश तथा फोटो-वीडियोग्राफी पर लगाए गए प्रतिबंधों का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद फिलहाल याचिकाकर्ता को राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान और उत्तर प्रदेश में जारी ऐसे प्रशासनिक आदेशों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को सुनने से इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत के इस आदेश को देशभर में पत्रकारों या YouTubers की सरकारी स्कूलों में एंट्री पर रोक लगाने वाला फैसला मानना सही नहीं होगा।
मामला Priya Mishra बनाम Union of India एवं अन्य, W.P.(C) No. 1095/2026 से संबंधित है। 1 सितंबर 2026 को यह मामला सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध था। उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड में भी इस याचिका को इसी पीठ के समक्ष admission के लिए सूचीबद्ध किया गया था।
Article 32 के तहत दायर थी याचिका
याचिका में राजस्थान और उत्तर प्रदेश के शिक्षा अधिकारियों की ओर से जारी उन निर्देशों को चुनौती दी गई थी, जिनमें सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश तथा फोटो, वीडियो, इंटरव्यू, ऑडियो रिकॉर्डिंग और लाइव स्ट्रीमिंग के लिए पूर्व अनुमति की व्यवस्था की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर विस्तृत सुनवाई करने के बजाय कहा-
“We are not inclined to entertain the writ petition filed under Article 32 of the Constitution of India.”
इसके बाद अदालत ने याचिका को entertain करने से इनकार कर दिया।
यहां कानूनी रूप से महत्वपूर्ण अंतर यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने इन प्रतिबंधों को संवैधानिक घोषित करते हुए कोई विस्तृत फैसला नहीं दिया। अदालत ने Article 32 के तहत दाखिल इस विशेष याचिका को सुनने से इनकार किया है। इसलिए इसे पूरे देश में पत्रकारों के लिए सरकारी स्कूलों में प्रवेश पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से लगाई गई रोक के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
राजस्थान में क्या है व्यवस्था?
राजस्थान के माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की 16 अगस्त 2026 की गाइडलाइन में सरकारी स्कूल परिसर में बाहरी लोगों के प्रवेश के लिए प्रधानाचार्य या संस्था प्रमुख की पूर्व अनुमति की व्यवस्था की गई। साथ ही स्कूल परिसर में फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, इंटरव्यू, ऑडियो रिकॉर्डिंग और लाइव स्ट्रीमिंग के लिए भी पूर्व लिखित अनुमति आवश्यक बताई गई है।
इन निर्देशों के पीछे विद्यार्थियों की सुरक्षा, निजता और गरिमा की रक्षा का तर्क दिया गया है। दूसरी ओर, आलोचना यह है कि सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति- जैसे भवन, शौचालय, पेयजल, बिजली, कक्षाओं और अन्य बुनियादी सुविधाओं- की स्वतंत्र निगरानी और सार्वजनिक दस्तावेजीकरण प्रभावित हो सकता है।
उत्तर प्रदेश में भी जारी हुए आदेश
उत्तर प्रदेश में अयोध्या के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने 19 अगस्त को आदेश जारी कर परिषद के स्कूलों में बाहरी लोगों, YouTubers और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों के बिना पूर्व अनुमति प्रवेश पर रोक लगाई। बिना अनुमति फोटो और वीडियो बनाने पर भी कार्रवाई की बात कही गई।
याचिका में उत्तर प्रदेश के आजमगढ़, बलिया, बस्ती, बलरामपुर, शामली और आगरा सहित कई अन्य जिलों में जारी इसी तरह के निर्देशों का भी उल्लेख किया गया है।
‘School Thik Karo’ अभियान से जुड़ा विवाद
यह मामला उस समय ज्यादा चर्चा में आया जब ‘School Thik Karo’ अभियान के माध्यम से सरकारी स्कूलों की आधारभूत सुविधाओं और व्यवस्थाओं की स्थिति को सार्वजनिक रूप से सामने लाने का प्रयास किया जा रहा था। याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि बच्चों की निजता और सुरक्षा की रक्षा जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर सरकारी संस्थानों की जनहित में स्वतंत्र निगरानी को पूरी तरह सीमित नहीं किया जाना चाहिए।
याचिका में यह अंतर भी रखा गया था कि किसी बच्चे की पहचान योग्य तस्वीर या निजी जानकारी रिकॉर्ड करना अलग विषय है, जबकि स्कूल की टूटी इमारत, खराब शौचालय, पेयजल, बिजली, कक्षाओं या अन्य सार्वजनिक बुनियादी सुविधाओं का दस्तावेजीकरण अलग विषय है। याचिकाकर्ता ने ऐसे प्रतिबंधों को reasonableness, necessity और proportionality की कसौटी पर परखे जाने की मांग की थी।
अब स्थिति क्या है?
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद राजस्थान और उत्तर प्रदेश के संबंधित प्रशासनिक निर्देश अपने आप निरस्त नहीं हुए हैं। इसलिए जहां ऐसे आदेश प्रभावी हैं, वहां पत्रकारों, YouTubers या अन्य बाहरी लोगों को स्कूल परिसर में प्रवेश और रिकॉर्डिंग के लिए संबंधित अनुमति प्रक्रिया का पालन करना होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के सरकारी स्कूलों में पत्रकारों या YouTubers के प्रवेश पर कोई नया राष्ट्रव्यापी प्रतिबंध नहीं लगाया है।
अदालत ने केवल इस विशेष Article 32 याचिका को entertain करने से इनकार किया है।
