-संतोष श्रीवास्तव की रिपोर्ट
‘ड्रग्स से परे बचपन’ व्याख्यान में बोले न्यायमूर्ति सूर्यकांत, पुनर्वास और मानवीय दृष्टिकोण पर दिया जोर
पटना, 26 सितंबर: बिहार लोक भवन में आयोजित पाटलिपुत्र प्रज्ञा प्रवाह श्रृंखला के तहत ‘ड्रग्स से परे बचपन: संरक्षण, देखभाल और पुनर्समावेशन’ विषय पर भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों में नशे की समस्या केवल स्वास्थ्य या अपराध तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनकी सुरक्षा, शिक्षा और भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है। नशे की चपेट में आए बच्चों को इलाज, देखभाल, शिक्षा और सामान्य जीवन में लौटने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।

पाटलिपुत्र की ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि बच्चों को दोषी ठहराने के बजाय उनकी परिस्थितियों—जैसे गरीबी, उपेक्षा या पारिवारिक प्रतिकूलता—को समझकर सहायता करनी होगी। बच्चों को नशे के अवैध कारोबार में धकेलने वालों पर सख्त कार्रवाई की जरूरत है। वहीं, राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने अपने संबोधन में कहा कि नशे में फंसा हर बच्चा अपराधी नहीं, बल्कि कई बार स्वयं पीड़ित होता है। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर ड्रग्स तस्करी नेटवर्क पर कड़ी निगरानी और बच्चों के पुनर्वास पर बल दिया। कार्यक्रम में पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव, न्यायमूर्ति सुधीर सिंह, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, महाधिवक्ता एस.डी. संजय, राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह, सीएनएलयू के कुलपति प्रो. फैजान मुस्तफा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।
