चंदा अखौरी में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण का आरोप, 74 ग्रामीणों ने डीएम से की कार्रवाई की मांग

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Santosh K Srivastav : Editor in Chief & Publisher

सौंपे गए आवेदन में सरकारी भूमि की नापी, अतिक्रमण हटाने और ग्रामीणों को धमकी देने वालों पर कार्रवाई की मांग

आरा, भोजपुर, 04 जून, 2026 : भोजपुर जिले के आरा मुफ्फसिल थाना क्षेत्र अंतर्गत चंदा अखौरी गांव के 74 ग्रामीणों ने सरकारी जमीन पर कथित अतिक्रमण और ग्रामीणों को धमकी दिए जाने के मामले में जिलाधिकारी भोजपुर को सामूहिक आवेदन सौंपकर हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव तथा उसके आसपास स्थित सरकारी भूमि पर वर्षों से अवैध कब्जा किया गया है, जिससे सरकारी राजस्व की हानि होने के साथ-साथ आम लोगों को आवागमन में भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों द्वारा 4 जून को जिलाधिकारी कार्यालय में दिए गए आवेदन के अनुसार, चंदा अखौरी गांव के चारों ओर लगभग 15 एकड़ सरकारी भूमि पर विभिन्न लोगों द्वारा कब्जा कर लिया गया है। इसके अलावा गोवर्धन स्थान के समीप स्थित करीब 9 कट्ठा सरकारी जमीन पर भी अतिक्रमण किए जाने का आरोप लगाया गया है।

आवेदन में कहा गया है कि गांव के बीच से गुजरने वाला लगभग 20 फीट चौड़ा मुख्य रास्ता भी अतिक्रमण की चपेट में है। आरोप है कि कई लोगों ने निर्धारित सीमा से आगे बढ़कर मकान निर्माण कर लिया है, जिससे सड़क संकरी हो गई है और ग्रामीणों के आवागमन में बाधा उत्पन्न हो रही है।

ग्रामीणों ने यह भी बताया है कि गांव के चारों ओर स्थित सरकारी गड्ढानुमा भूमि की पहले मत्स्य विभाग द्वारा बंदोबस्ती की जाती थी, जिससे सरकार को राजस्व प्राप्त होता था। लेकिन कथित अतिक्रमणकारियों द्वारा इन गड्ढों को भर दिए जाने के कारण यह व्यवस्था समाप्त हो गई है, जिससे सरकारी आय पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

आवेदन में चमटोली से नदी तक लगभग 4000 फीट लंबे रास्ते का भी उल्लेख किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि इस मार्ग की चौड़ाई विभिन्न स्थानों पर 10 से 18 फीट के बीच है और इसके किनारों पर भी अतिक्रमण कर मकान बना लिए गए हैं।

ग्रामीणों ने जिला परिषद से प्रस्तावित सड़क निर्माण कार्य को लेकर भी आपत्ति दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि सड़क निर्माण के लिए अतिक्रमण हटाने के बजाय कुछ रैयती भूमि को सरकारी जमीन बताकर रास्ता देने का दबाव बनाया जा रहा है। आवेदन में यह भी दावा किया गया है कि संबंधित लोगों द्वारा विरोध करने पर जान-माल की धमकी दी जा रही है, जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल है।

इसके अतिरिक्त ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि चंदा गांव से सेमरिया तक नदी किनारे लगभग 10 किलोमीटर लंबी सरकारी परती भूमि पर भी अतिक्रमण किया गया है।

ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से सरकारी अमीन द्वारा भूमि की नापी कराने, सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने, मुख्य सड़कों और गलियों को चौड़ा करने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

उल्लेखनीय है कि इस आवेदन पर 74 ग्रामीणों के हस्ताक्षर हैं और इसे 4 जून को जिलाधिकारी कार्यालय में जमा कराया गया था। ग्रामीणों के अनुसार, आवेदन फिलहाल विचाराधीन है और प्रशासनिक कार्रवाई की प्रतीक्षा की जा रही है।