विश्व हिन्दी परिषद ने तय की आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा

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एस०एन०चतुर्वेदी की रिपोर्ट

केंद्रीय कार्यालय में बैठक, हिन्दी के वैश्विक प्रचार-प्रसार और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारियों पर बनी रणनीति

नई दिल्ली, 31 जुलाई। विश्व हिन्दी परिषद के केंद्रीय कार्यालय में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में परिषद के पदाधिकारियों, साहित्यकारों और हिन्दी प्रेमियों ने हिन्दी के वैश्विक प्रचार-प्रसार, संगठन के विस्तार तथा आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में परिषद के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. विपिन कुमार के साथ राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य एवं गुजरात प्रदेश अध्यक्ष वैभव वेकरिया, राष्ट्रीय समन्वयक मुकुल पांडे, गेल के राजभाषा अधिकारी शक्तिवीर सिंह, ईआईएल के राजभाषा अधिकारी विष्णु कुमार विष्णोई तथा साहित्यकार भावेश डोबरिया उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान भारतीय संस्कृति के संवर्धन, राजभाषा हिन्दी के प्रभावी क्रियान्वयन, संगठन को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सशक्त बनाने तथा हिन्दी भाषा के व्यापक प्रचार-प्रसार से जुड़े विभिन्न विषयों पर सार्थक विचार-विमर्श किया गया।

राष्ट्रीय महासचिव डॉ. विपिन कुमार ने परिषद की वर्तमान गतिविधियों और आगामी कार्यक्रमों की जानकारी साझा करते हुए सभी सदस्यों से हिन्दी के संवर्धन, राष्ट्रहित के कार्यों तथा संगठन के विस्तार में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हिन्दी को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने के लिए सामूहिक प्रयास और निरंतर जनसहभागिता आवश्यक है।

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बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों ने भविष्य में हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार, भारतीय संस्कृति के संरक्षण तथा समाजहित के कार्यक्रमों को मिलकर आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। साथ ही परिषद की गतिविधियों को देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों तक विस्तार देने की रणनीति पर भी चर्चा की गई।

बैठक में विश्व हिन्दी परिषद द्वारा 30 एवं 31 अक्टूबर 2026 को आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। सम्मेलन का मुख्य विषय “भारतरत्न अटल : हिन्दी, राष्ट्रवाद और सुशासन” निर्धारित किया गया है। इस सम्मेलन में देश-विदेश के विद्वान, शिक्षाविद्, साहित्यकार, शोधार्थी तथा नीति-निर्माताओं की सहभागिता प्रस्तावित है। परिषद का उद्देश्य इस आयोजन के माध्यम से हिन्दी भाषा, भारतीय संस्कृति और राष्ट्रवादी विचारधारा के वैश्विक प्रचार-प्रसार को नई दिशा प्रदान करना है।