डीपीएस बोकारो के ‘धरोहर’ उत्सव का भव्य समापन, नृत्य प्रतियोगिता में झलकी वैश्विक सांस्कृतिक विरासत

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– Santosh K Srivastav : Editor in Chief & Publisher

अधिशासी निदेशक राजश्री बनर्जी बोलीं- कला और संस्कृति हमें अपनी जड़ों से जोड़ती है, भारतीय व विदेशी नृत्य शैलियों की जुगलबंदी ने मोहा मन

बोकारो, 31 जुलाई। दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) बोकारो में आयोजित चार दिवसीय सांस्कृतिक उत्सव ‘धरोहर’ का समापन शुक्रवार को अंतर-सदन नृत्य प्रतियोगिता के साथ भव्य एवं रंगारंग माहौल में हुआ। भारतीय शास्त्रीय और विभिन्न देशों की पारंपरिक नृत्य शैलियों के अद्भुत समन्वय ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों की कलात्मक प्रतिभा, सांस्कृतिक विविधता और वैश्विक दृष्टिकोण की प्रभावशाली प्रस्तुति देखने को मिली।

समापन समारोह में मुख्य अतिथि बोकारो इस्पात संयंत्र की अधिशासी निदेशक (मानव संसाधन) एवं डीपीएस बोकारो प्रबंधन समिति की प्रो-वाइस चेयरपर्सन राजश्री बनर्जी ने कहा कि कला की कोई सीमा नहीं होती। यह सीमाओं के पार भी लोगों को एक सूत्र में बांधती है और हमारी संस्कृति व कला हमें अपनी जड़ों से जोड़ती है। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और संवर्धन समय की आवश्यकता है तथा विद्यालय इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों की उत्कृष्ट प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं है, बल्कि तनावमुक्त और संतुलित जीवन के लिए कला, संगीत और संस्कृति भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने ऐसे आयोजनों के लिए विद्यालय परिवार को बधाई देते हुए विद्यार्थियों से उपलब्ध अवसरों का भरपूर लाभ उठाकर अपनी प्रतिभा को निखारने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि ने विद्यालय के प्राचार्य डॉ. ए. एस. गंगवार एवं वरिष्ठ शिक्षकों के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर किया। प्राचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि ‘धरोहर’ उत्सव ने विद्यार्थियों को न केवल भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़ा, बल्कि उन्हें वैश्विक सांस्कृतिक दृष्टिकोण भी प्रदान किया। विद्यालय विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए उनकी रचनात्मकता, अनुशासन और कलात्मक प्रतिभा को मंच उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि को शॉल एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।

अंतर-सदन नृत्य प्रतियोगिता कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रही। विद्यार्थियों ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैलियों को विभिन्न देशों की पारंपरिक नृत्य विधाओं के साथ अनूठे अंदाज में प्रस्तुत कर पूरब और पश्चिम की सांस्कृतिक एकता का मनमोहक दृश्य प्रस्तुत किया।

गंगा हाउस ने कथकली और चीन के फैन डांस का आकर्षक समन्वय प्रस्तुत किया। चेनाब हाउस ने कत्थक और अमेरिकी साल्सा के संयोजन से दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। जमुना हाउस ने मणिपुरी और रूस के कलिनका नृत्य का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। सतलज हाउस ने मोहिनीअट्टम और नेपाल के मारुनी नृत्य को एक साथ प्रस्तुत किया। रावी हाउस ने भरतनाट्यम एवं श्रीलंका के कैंडियन डांस का सुंदर समन्वय दिखाया, जबकि झेलम हाउस ने ओडिसी और स्पेन के प्रसिद्ध फ्लेमेंको नृत्य की शानदार प्रस्तुति देकर दर्शकों का मन मोह लिया।

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प्रतियोगिता के परिणामों में जमुना हाउस और चेनाब हाउस संयुक्त रूप से प्रथम स्थान पर रहे। गंगा हाउस और सतलज हाउस को संयुक्त द्वितीय तथा झेलम हाउस और रावी हाउस को संयुक्त तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। प्रतियोगिता का मूल्यांकन निर्णायक नीलम सिंह, प्रतिभा सिंह और प्रीति मिश्रा ने किया।

इससे पूर्व आयोजित अंतर-सदन समूहगान प्रतियोगिता में सतलज हाउस ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। चेनाब हाउस और झेलम हाउस संयुक्त रूप से द्वितीय तथा जमुना हाउस और रावी हाउस संयुक्त रूप से तृतीय स्थान पर रहे।

चार दिवसीय सांस्कृतिक उत्सव ‘धरोहर’ का समापन विद्यार्थियों की शानदार प्रस्तुतियों, सांस्कृतिक समन्वय और उत्साहपूर्ण वातावरण के बीच हुआ। कार्यक्रम ने भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ वैश्विक संस्कृति के प्रति सम्मान और समरसता का संदेश भी दिया।